हरिद्वार (आरसी / संदीप कुमार) भारत की आगामी जनगणना 2027 को लेकर प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है। जिला जनगणना अधिकारी पी.आर. चौहान ने उत्तराखंड शासन की अधिसूचना का हवाला देते हुए जनपद हरिद्वार की जनता से इस राष्ट्रीय महत्व के कार्य में पूर्ण सहयोग की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि मकान सूचीकरण और जनसंख्या गणना के दौरान पूछे गए प्रश्नों का सटीक और स्पष्ट उत्तर देना हर नागरिक का कानूनी कर्तव्य है, क्योंकि यही आंकड़े भविष्य में केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियों, योजनाओं और विकास कार्यों का मुख्य आधार बनते हैं।
जनगणना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए अधिकारी ने बताया कि इन आंकड़ों का उपयोग न केवल लोक प्रशासन के लिए किया जाता है, बल्कि संसदीय क्षेत्रों, विधानसभाओं और पंचायतों के परिसीमन व आरक्षण के निर्धारण में भी इसकी अहम भूमिका होती है। जनगणना अधिनियम 1948 के प्रावधानों के अनुसार, प्रत्येक व्यक्ति अधिकारी द्वारा पूछे गए सवालों का अपनी सर्वोत्तम जानकारी के अनुसार उत्तर देने के लिए कानूनी रूप से आबद्ध है। हालांकि, सामाजिक परंपराओं का सम्मान करते हुए महिलाओं को परिवार के अन्य सदस्यों या पति का नाम बताने से छूट दी गई है, जहाँ रूढ़ियाँ इसकी अनुमति नहीं देतीं।
अधिनियम की धारा 9 और 10 के तहत मकान मालिक या अधिभोगी का यह दायित्व है कि वे जनगणना अधिकारियों को परिसर में प्रवेश करने दें और मकानों पर नंबर या चिन्ह लगाने की अनुमति प्रदान करें। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि जनगणना कार्य में बाधा डालना, जानबूझकर गलत जानकारी देना या जनगणना के लिए लगाए गए नंबरों को मिटाना भारी पड़ सकता है। ऐसे मामलों में अधिनियम की धारा 11 के तहत एक हजार रुपये तक का जुर्माना और गंभीर उल्लंघन की स्थिति में तीन वर्ष तक के कारावास की सजा का प्रावधान है।
राहत की बात यह है कि जनगणना के दौरान साझा की गई जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है। अधिनियम की धारा 15 के अनुसार, इन अभिलेखों का उपयोग किसी भी दीवानी या फौजदारी मामले में साक्ष्य के तौर पर नहीं किया जा सकता और न ही इनका निरीक्षण किया जा सकेगा। जिला जनगणना अधिकारी ने समस्त जनपदवासियों से अपील की है कि वे जनगणना कर्मियों को सही विवरण देकर राष्ट्र निर्माण के इस पुनीत कार्य में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।
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