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‘टूटे मोबाइल’ ने खोला मौत का राज: ज्वालापुर पुलिस की संवेदनशीलता से हिमाचल के परिवार को मिले पिता के अंतिम दर्शन

Byआर सी

May 7, 2026

हरिद्वार (आरसी / संदीप कुमार) मौत के सन्नाटे में जब पहचान खो चुकी एक लाश गंगनहर के किनारे मिली, तो किसी को यह उम्मीद नहीं थी कि उसका वारिस मिल पाएगा। लेकिन हरिद्वार पुलिस की अथक मेहनत और एक टूटे हुए मोबाइल की छोटी सी उम्मीद ने नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया है। ज्वालापुर पुलिस ने तीन दिनों की कड़ी जद्दोजहद के बाद न सिर्फ अज्ञात शव की शिनाख्त की, बल्कि हिमाचल प्रदेश में बैठे बिलखते परिवार तक उनके पिता की खबर पहुँचाकर इंसानियत की एक बड़ी मिसाल पेश की है।

मामला बीती 4 मई 2026 का है, जब ज्वालापुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत रेगुलेटर पुल के पास जटवाड़ा पुल गंगनहर से एक अज्ञात पुरुष का शव बरामद हुआ था। मृतक की जेब में न तो कोई पहचान पत्र था और न ही कोई ऐसा दस्तावेज जिससे उसकी पहचान हो सके, जिसके चलते पुलिस के सामने शिनाख्त करना एक बड़ी चुनौती बन गया था। पुलिस ने पंचनामा भरकर शव को जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया था। तलाशी के दौरान मृतक की जेब से एक पुराना और बुरी तरह क्षतिग्रस्त मोबाइल फोन मिला था, जिसमें लगा सिम कार्ड ही पुलिस के लिए एकमात्र उम्मीद की किरण बचा था।

थाना कार्यालय में तैनात पुलिसकर्मियों ने अपनी सूझबूझ का परिचय देते हुए उस सिम कार्ड को निकालकर अपने मोबाइल में सक्रिय किया। शुरुआती कोशिशों में कोई डेटा प्राप्त नहीं हुआ, लेकिन पुलिस ने सिम को सक्रिय रखा। आखिरकार 6 मई को उस नंबर पर एक कॉल आई, जिससे पता चला कि यह नंबर ‘बिट्टू’ नामक व्यक्ति का है जो कारपेंटर का काम करता था। इसी सुराग के जरिए पुलिस ने मृतक की पुत्री हंसा देवी से संपर्क साधा, जो हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले की रहने वाली है।

बेटी ने रोते हुए बताया कि उसके पिता ताराचन्द उर्फ बिट्टू निवासी मंडी, हिमाचल प्रदेश, पिछले कुछ दिनों से लापता थे और घर से यह कहकर निकले थे कि वे नौकरी की तलाश में जा रहे हैं। व्हाट्सएप के माध्यम से जब पुलिस ने मृतक के फोटो भेजे, तो परिजनों ने उनकी पहचान कर ली। आज 7 मई को मृतक के बेटे नवीन कुमार और अन्य परिजनों ने कोतवाली ज्वालापुर पहुँचकर शव की शिनाख्त की, जिसके बाद पोस्टमार्टम की कार्यवाही पूर्ण कर शव उन्हें सौंप दिया गया। परिजनों ने भावुक होकर कहा कि अगर पुलिस इतनी तत्परता और संवेदनशीलता न दिखाती, तो वे अपने पिता के अंतिम दर्शन तक नहीं कर पाते। इस सराहनीय कार्य में अ.उ.नि. कमला चौहान और कांस्टेबल मनोज डोभाल की भूमिका अहम रही।

 

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