पिरान कलियर: उत्तराखंड की हॉट सीट मानी जाने वाली पिरान कलियर विधानसभा में जैसे-जैसे 2027 के विधानसभा चुनावों की तारीखें नजदीक आ रही हैं, राजनीतिक दलों और दावेदारों की सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। क्षेत्र में लगातार नए स्वागत कार्यक्रम, जनसंपर्क अभियानों और सियासी उठापटक का दौर शुरू हो चुका है, जो इस बात का गवाह है कि इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प होने वाला है।
राजनीति के इस अखाड़े में कांग्रेस पार्टी के विधायक फुरकान अहमद पिछले तीन लगातार चुनावों यानी 2012, 2017 और 2022 से जीत दर्ज करते आ रहे हैं। साल 2012 के चुनाव में फुरकान अहमद ने बसपा के शहजाद को बेहद मामूली यानी 2.63 प्रतिशत वोट मार्जिन से मात दी थी, जहां कांग्रेस को 25,870 और बसपा को 23,926 वोट मिले थे, जबकि बीजेपी के श्यामवीर सैनी 21,648 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे थे। इसके बाद 2017 के कांटे के मुकाबले में फुरकान अहमद ने 29,243 वोट हासिल कर बीजेपी के जयभगवान सैनी को 27,894 वोटों के साथ मात्र 1,349 वोटों के अंतर से हराया था। इस चुनाव में कांग्रेस के वोट शेयर में 2.75 प्रतिशत की हल्की गिरावट देखने को मिली थी, जबकि बीजेपी ने 1.47 प्रतिशत की बढ़त बनाई थी। वहीं, 2022 के पिछले चुनाव में कांग्रेस की स्थिति और मजबूत हुई, जहां फुरकान अहमद ने 43,539 वोट हासिल कर प्रचंड जीत दर्ज की और उनके मुकाबले बीजेपी के मुनीश कुमार सैनी को 27,796 वोट मिले। इस बार कांग्रेस के वोट बैंक में 11.89 प्रतिशत की जोरदार बढ़त दर्ज की गई थी।
जब-जब देश और प्रदेश में मोदी लहर का प्रचंड प्रभाव देखने को मिला, तब-तब भी बीजेपी इस सीट को अपने पाले में लाने में नाकामयाब रही है। हालांकि, मौजूदा समय में सरकार के कामकाज को लेकर क्षेत्र में कुछ छिटपुट विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिले हैं, जिसके चलते सियासी गलियारों में यह सवाल बड़ा हो गया है कि क्या इन मुद्दों के सहारे इस बार बीजेपी पिरान कलियर में जीत हासिल करने में कामयाब हो पाएगी।
कांग्रेस के इस भारी-भरकम किले को ध्वस्त करने के लिए मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के खेमे में दावेदारों की लंबी फेहरिस्त है और पार्टी मुख्य रूप से सैनी समाज के चेहरों पर दांव लगाती नजर आ रही है। मुनीश सैनी जो 2022 में पार्टी के उम्मीदवार रह चुके हैं, वर्तमान में राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य ओबीसी और उत्तर प्रदेश ओबीसी मोर्चा के सह-प्रभारी हैं और एक बार फिर टिकट के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। इसके अलावा रोमा सैनी ने प्रदेश उपाध्यक्ष महिला ओबीसी मोर्चा के रूप में क्षेत्र में महिला नेत्री के तौर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है। इस बार टिकट की दौड़ में एक नए और मजबूत महिला चेहरे के रूप में रोमा सैनी की दावेदारी ने समीकरणों को और रोचक बना दिया है, जिससे यह चर्चा तेज है कि क्या बीजेपी इस बार महिला उम्मीदवार पर दांव खेलकर कोई बड़ा उलटफेर करने में सफल होगी। साथ ही, पूर्व जिला अध्यक्ष राजेश सैनी भी टिकट की दौड़ में शामिल हैं और फुरकान अहमद के किले को भेदने की पुरजोर कोशिश में जुटे हैं। इसके अलावा 2017 में पार्टी के उम्मीदवार रह चुके जयभगवान सैनी भी चुनाव का लंबा अनुभव रखते हैं।
सिर्फ कांग्रेस और बीजेपी ही नहीं, बल्कि अन्य दल और नए चेहरे भी समीकरण बिगाड़ने के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रहे हैं। आजाद समाज पार्टी की तरफ से रुड़की रामपुर नगर पंचायत चेयरमैन परवेज सुल्तान एक नई राजनीतिक मुस्कान और ऊर्जा के साथ घर-घर जनसंपर्क कर जनता के बीच अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। ऐसे में यह सवाल भी खड़ा होता है कि क्या परवेज सुल्तान का बढ़ता जनआधार इस चुनाव में कोई बड़ा उलटफेर करने में कामयाब हो पाएगा। पिछले 2022 के चुनाव में बसपा के सुरेंद्र सिंह सैनी को 11,716 और आज़ाद समाज पार्टी के अब्दुल वहीद को 11,441 वोट मिले थे। कलियर क्षेत्र में भीम आर्मी और आज़ाद समाज पार्टी के बढ़ते प्रभाव से बसपा के पारंपरिक वोटों में भी सेंध लगती दिख रही है।
आंकड़ों की माने तो पिरान कलियर में कांग्रेस की जीत और हार का सीधा ताल्लुक बीजेपी के उम्मीदवार और अन्य दलों द्वारा काटे जाने वाले वोटों के समीकरण पर निर्भर करता है। जहां एक ओर फुरकान अहमद अपनी तीन बार की जीत के इतिहास के साथ सबसे मजबूत कड़ी के रूप में खड़े हैं, वहीं बीजेपी के भीतर सैनी चेहरों की लंबी फौज, रोमा सैनी जैसी नई महिला दावेदारी और परवेज सुल्तान जैसे नए क्षेत्रीय चेहरों की एंट्री ने 2027 के चुनाव को बेहद रोमांचक बना दिया है। बसपा की तरफ से अभी किसी की उम्मीदवारी नज़र नहीं आती हैं। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या इस बार बीजेपी या नए सियासी चेहरे इतिहास बदलने में कामयाब होंगे या फुरकान अहमद अपना वर्चस्व कायम रखेंगे। वा
क्या इस बार पिरान कलियर की जनता बदलाव के मूड में नजर आएगी या कांग्रेस का पुराना तिलिस्मी वोट बैंक बरकरार रहेगा?
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