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हर बार अतिक्रमण के नाम पर चित्रा टाकिज के सामने खोखा धारकों को उजाड़ने की बार-बार करता है निगम व स्थानीय प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना 

Byआर सी

Mar 1, 2026

हरिद्वार (संदीप कुमार/आर सी)। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पिछले कई सालों से बार-बार अवहेलना करने पर आमादा है हरिद्वार नगर निगम/स्थानीय प्रशासन। हरिद्वार नगर निगम व जिला प्रशासन पिछले 16 सालों से चित्रा टाकिज के सामने रखे खोखा धारकों के साथ लगातार उपेक्षा कर रहा है। जिससे आजीज आकर खोखाधारक खुदखुशी करने पर विवश हो गए हैं। इसी कड़ी में रेलवे स्टेशन से लेकर पुरूषार्थी मार्केट तक नालों पर बनी निगम द्वारा स्थापित की गयी अस्थाई दुकानों को कभी अतिक्रमण व कभी नालों की सफाई के नाम पर ध्वस्त किया जाता रहा है, जिसका विरोध वहां मौजूद व्यापारियों द्वारा किया जाता है।

फ़ाइल फ़ोटो

मौके पर मौजूद व्यापारी सुप्रीम कोर्ट के आदेश दिखाने का प्रयास करते हैं और कई बाद रजिस्ट्री व स्वयं आदेशों की प्रति भी जमा करा चुके हैं, लेकिन कुछ निगम के अधिकारी व स्थानीय प्रशासन के अधिकारी व्यापारियों की एक न सुनते हुए और पीले पंजे की मदद से सभी दुकानें ध्वस्त करते हुए सारा सामान जब्त कर लेते हैं। पीड़ित खोखाधारकों द्वारा इस गरीब विरोधी कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि नगर निगम व जिला एवं स्थानीय प्रशासन को नालों पर बने पक्के निर्माण दिखाई नहीं देते और बड़े रसूकदारों से उलझने की हिम्मत नहीं जुटा पाते, सिर्फ खानापूर्ति के लिए हम गरीबों को उजाड़ने की नीयत से गरीबों पर अत्याचार करने पर आमादा हैं।

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पिछले 16 सालों से दुकानें देने का लॉलीपॉप चित्रा टाकिज के खोखाधारकों को दिया हुआ है, लेकिन आज तक कोई समाधान नहीं किया गया है, जबकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 27 नवम्बर 2015 को तीन माह के भीतर विकल्प देने का आदेश पारित किया था, जिसे 11 वर्ष बीत चुके हैं और खोखाधारकों को विकल्प न मिलने तक वहीं बैठाये जाने के लिए निगम की ओर से 6 माह की रसीदें भी काटी गयीं थी और प्रत्येक खोखाधारक से 92 हजार रुपये बकायदा रसीदें भी काटी गयीं, जिसकी अवहेलना लगातार निगम, पुलिस व जिला प्रशासन द्वारा की जा रही है। मौके पर मौजूद खोखाधारकों ने दमनकारी गरीब विरोधी कार्रवाई से तंग आकर इच्छा मृत्यु की मांग सरकार से की है। विरोध प्रदर्शन में रामनाथ, संजय चौहान (सोनू), दीपक, किशोर, राकेश चौहान, बलवीर, संजय कुमार, विपिन, राजेंद्र, अशोक चड्ढा, विकास चन्द्रा, घनश्याम, मंगल, अमित, प्रेम, राजकुमार, रितिक आदि मौजूद थे।

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बता दें कि माननीय उच्चतम न्यायालय ने नगर निगम हरिद्वार को 27 नवम्बर 2015 को आदेश दिया था कि हटाये गये 115 पिटीशनर्स को 03 माह के भीतर रोजगार के लिए स्थान उपलब्ध कराया जाए। लेकिन माननीय उच्चतम न्यायालय को नगर निगम हरिद्वार को आदेश दिये 11 वर्ष का समय बीत चुका है। लेकिन उसके बावजूद हटाये गये खोखा धारकों को रोजगार के लिए स्थान उपलब्ध नहीं कराया गया है। जबकि नगर निगम हरिद्वार द्वारा रोजगार के लिए स्थान उपलब्ध कराने के एवज में हटाये गये प्रति पिटीशनर्स से 92 हजार रूपये टोकन मनी के रूप में जमा कराई जा चुकी है। इसके अलावा प्रत्येक पिटीशनर्स से नगर निगम हरिद्वार 06 माह का अग्रिम किराया भी जमा करा चुका है। लेकिन उसके बावजूद खोखा धारक अपने को ठगा से महसूस कर रहे है।लेकिन नगर निगम हरिद्वार द्वारा 115 पिटीशनर्स से 06 माह का अग्रिम किराया और रोजगार के लिए स्थान उपलब्ध कराने के एवज में प्रति पिटीशनर्स से 92 हजार रूपये टोकन मनी के रूप में जमा करने के बाद भी उनको रोजगार के लिए स्थान उपलब्ध नहीं कराया गया है। लघु व्यापारिक समिति हरिद्वार ने पत्र के माध्यम से मुख्य नगर आयुक्त नगर निगम हरिद्वार से पीडित पिटीशनर्स को जल्द व्यापार करने के लिए स्थान उपलब्ध करने की मांग की है। ताकि वह सम्मानजनक व्यापार कर अपने परिवार का भरण पोषण कर सकें।

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लघु व्यापारिक समिति हरिद्वार ने मुख्य नगर आयुक्त नगर निगम हरिद्वार को एक पत्र देकर माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा 27 नवम्बर 2015 को दिए गये आदेशों का हवाला देते हुए पालन कराने की मांग की है। लघु व्यापारिक समिति हरिद्वार के अध्यक्ष चोखेलाल ने मुख्य नगर आयुक्त हरिद्वार को दिये गये पत्र में कहा गया हैं कि 19 अगस्त 2010 को चित्रा सिनेमा के सामने रेलवे रोड़ हरिद्वार को उजाड़े गये खोखा धारकों, जिनके पास माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश थे कि पिटीयशनर्स को तब तक नहीं हटाया जा सकता, जब तक उनको दूसरे स्थान पर रोजगार उपलब्ध नहीं करा दिया जाए। जहां पर खोखा धारकों का रोजगार सुचारू रूप से चल सकें। लेकिन प्रशासन द्वारा माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेशों की परवाह न करते हुए खोखा धारकों को जबरन हटा दिया गया था।

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By आर सी

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