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बेजुबान’ की बेबसी और ‘इंसानों’ की हैवानियत: बहादराबाद में चलती-फिरती टॉर्चर सेल बनी पिकअप, दो आरोपी धरे गए, दो की तलाश जारी…….

Byआर सी

Mar 5, 2026

बहादराबाद (आरसी/संदीप कुमार): विकास के इस दौर में जहां इंसान चांद पर घर बनाने की सोच रहा है, वहीं कुछ लोग आज भी मध्यकालीन बर्बरता को ढोने में गर्व महसूस कर रहे हैं। मामला बुधवार की काली रात का है, जब बहादराबाद पुलिस ने पशु क्रूरता के उन ‘स्वघोषित ठेकेदारों’ का भंडाफोड़ किया, जिनके लिए एक बेजुबान की जान महज चंद रुपयों का सौदा है।

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बुधवार की रात करीब साढ़े नौ बजे, जब दुनिया चैन की नींद सोने की तैयारी कर रही थी, तब शांतरशाह चौकी प्रभारी उमेश कुमार और उनकी टीम में शामिल सिपाही चंदन चौहान, वीरेंद्र शर्मा और शाहलम शांतारशाह चौकी क्षेत्र में गश्त पर थे। तभी मुखबिर ने खबर दी कि ग्राम भोरी से गोविंदपुर की ओर एक पिकअप जा रही है, जो किसी वाहन से ज्यादा टॉर्चर सेल लग रही है। पुलिस ने घेराबंदी की, तो जो नजारा दिखा वह मानवता को शर्मसार करने वाला था।

पिकअप के पिछले हिस्से में एक 6 साल के निर्दोष बैल को किसी सामान की तरह ठूंस कर रखा गया था। क्रूरता की हद देखिए—बैल के  पैरों को जूट और प्लास्टिक की रस्सियों से ऐसे जकड़ा गया था कि वह चाहकर भी अपनी पीड़ा बयान न कर सके। उसके मुंह को भी बेरहमी से बांधा गया था ताकि उसकी सिसकियां बाहर न निकल सकें। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उन रस्सियों को काटकर बेजुबान को इस ‘नरक’ से मुक्ति दिलाई।

पुलिस को देखते ही पिकअप चालक ने अपनी धावकता का परिचय दिया और अंधेरे का फायदा उठाकर ऐसे गायब हुआ जैसे गधे के सिर से सींग।  फरार ‘ सितारों’ की तलाश में पुलिस अब खाक छान रही है। हालांकि, गाड़ी में सवार दो अन्य आरोपी 36 साल के फुरकान और 19 साल के साहिल पुलिस के हत्थे चढ़ गए।

इन पकड़े गए आरोपियों ने बड़ी मासूमियत से सारा ठीकरा एक अन्य शेर अली पर फोड़ दिया, जिसने इस बैल को ‘पार्सल’ की तरह गाड़ी में लदवाया था।

बहादराबाद पुलिस ने बताया कि फिलहाल पुलिस ने मौके से  शेर अली सहित पकड़े गए दोनों आरोपियों को नामजद करते हुए, मौके से फरार वाहन चालक को अज्ञात में पशु क्रूरता अधिनियम के तहत संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया। और मौके से गिरफ़्तार दोनों आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है।

तंज की बात यह है कि कानून और पुलिस के खौफ से बेखौफ ये लोग शायद यह भूल गए थे कि बेजुबान की हाय और पुलिस का डंडा, दोनों ही जब पड़ते हैं तो कोई रसीद नहीं मिलती। अब देखना यह है कि फरार ‘धावक’ कब तक कानून की दौड़ से बाहर रह पाते हैं।

 

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By आर सी

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