हरिद्वार(आरसी/संदीप कुमार) हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण (HRDA) में नियमों को ताक पर रखकर किए जा रहे कार्यों और भ्रष्टाचार के गंभीर मामले सामने आए हैं। कांग्रेस नेता आशीष सैनी ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर प्राधिकरण के रुड़की कार्यालय के अधिकारियों पर भू-माफियाओं के साथ मिलकर सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का चूना लगाने और अवैध निर्माणों को बढ़ावा देने के सनसनीखेज आरोप मढ़े हैं। आशीष सैनी द्वारा साझा की गई इस जानकारी ने प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

आशीष सैनी का आरोप है कि अक्टूबर 2025 के दौरान रुड़की कार्यालय में एक बड़ा षड्यंत्र रचा गया, जिसके तहत पूर्व में निरस्त किए जा चुके आवासीय और व्यावसायिक भवनों के मानचित्रों को अवैध रूप से दोबारा स्वीकृति दी गई। नियमानुसार इन पर 50 प्रतिशत शमन शुल्क वसूला जाना अनिवार्य था, लेकिन अधिकारियों ने पुरानी फाइलें दबाकर न्यूनतम दरों पर नए प्रस्ताव स्वीकार किए। इस प्रक्रिया से सरकार को मिलने वाले भारी-भरकम राजस्व की जानबूझकर चोरी की गई।
क्षेत्र में फैल रहे अवैध निर्माणों के जाल पर प्रहार करते हुए सैनी ने बताया कि बेलडा और नगला इमरती जैसे क्षेत्रों में कृषि भूमि और बागों को उजाड़कर धड़ल्ले से अवैध कॉलोनियाँ काटी जा रही हैं। कई मामलों में तो कॉलोनी का मुख्य नक्शा स्वीकृत न होने के बावजूद उनके भीतर के भूखंडों के नक्शे पास कर दिए गए हैं। पतंजलि योगपीठ मार्ग पर एक निजी कॉलोनी के समीप चक-रोड और सिंचाई गूलों पर कब्जा कर आवासीय प्रोजेक्ट खड़े किए जा रहे हैं, जहाँ मात्र एक छोटे हिस्से की अनुमति लेकर शेष बड़े क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग का खेल चल रहा है।
एक और बड़ा आरोप मढ़ते हुए उदाहरण देकर सैनी ने बताया कि भगवानपुर के लकेश्वरी औद्योगिक क्षेत्र से सामने आया है। सैनी के अनुसार, वर्ष 2003 में शिक्षण कार्य के लिए खरीदी गई जीएसबीए कॉलेज की भूमि पर आज नियमों के विरुद्ध प्लाटिंग की जा रही है। बाहरी राज्यों के लोगों द्वारा राज्य सरकार को धोखे में रखकर किए जा रहे इस निर्माण पर शिकायतों के बावजूद स्थानीय प्रशासन मौन साधे हुए है।
इसके अतिरिक्त, कांग्रेस नेता ने आम जनता के उत्पीड़न का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि नए नक्शों की स्वीकृति के लिए पड़ोसियों के स्वीकृत मानचित्र मांगना पूरी तरह औचित्यहीन और निजता का उल्लंघन है, जिसके कारण आम लोगों के आवेदन बेवजह निरस्त किए जा रहे हैं। आशीष सैनी ने चेतावनी दी कि उत्तराखंड में भूमि अध्यादेश और रेरा (RERA) जैसे कानून केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं और विभागीय साठगांठ के चलते भ्रष्टाचार को खुला संरक्षण मिल रहा है। उन्होंने भविष्य में इन अवैध निर्माणों पर कानूनी कार्रवाई की तलवार लटकने और इसमें केवल आम जनता के पिसने की आशंका जताते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।


![]()
