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कलम, किताब और डिजिटल ख़्वाब: बदहाल पाठशालाओं की ‘तक़दीर’ बदलने का संकल्प, ‘कारवां-ए-सुधार’ अब गंगा की पावन देहरी पर!

Byआर सी

Mar 20, 2026

देहरादून (आरसी / संदीप कुमार) उत्तराखंड की वादियों में शिक्षा के गिरते मियाद और नौनिहालों के मुस्तकबिल को संवारने के लिए ‘सोशल ब्लू फ्रंट’ ने अज़्म का परचम बुलंद कर दिया है। संगठन के जांबाज रहनुमा कार्तिक टम्टा ने अपने हमराहियों—संजय कुमार लोहिया, गोपालराम सिराला, विनय टम्टा और हरीश प्रसाद—के साथ मिलकर बीते 7 मार्च को पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय पर जो आवाज़ बुलंद की थी। वह अब एक बड़े आंदोलन का रूप अख्तियार कर चुकी है।

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कार्तिक टम्टा ने हुकूमत को चेतावनी देते हुए कहा है कि प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी एक नासूर की मानिंद है। जब तक स्कूलों में काबिल और दीदावर शिक्षकों की मुस्तैदी नहीं होगी, तब तक ज्ञान का नूर घर-घर नहीं पहुँच सकेगा। उन्होंने मांग की है कि जर्जर हो चुकी इमारतों की मरम्मत कर उन्हें सुरक्षित बनाया जाए और मासूमों के लिए  शुद्ध जल व स्वच्छता का पुख्ता इंतजाम किया जाए।

आंदोलन की इस सभा में आधुनिक दौर की जरूरतों को भी शामिल किया गया है। सोशल ब्लू फ्रंट की पुरजोर मांग है कि स्कूलों में सिर्फ किताबी इल्म नहीं, बल्कि ‘डिजिटल तालीम’ का दौर शुरू हो। इसके लिए कंप्यूटर लैब और साहब-ए-इल्म कंप्यूटर शिक्षकों की बहाली अनिवार्य है। साथ ही, दूर-दराज के दुर्गम रास्तों से आने वाले छात्रों के लिए सरकारी परिवहन का इंतजाम करना रियासत का फर्ज है, ताकि रास्तों की दुश्वारियां किसी बच्चे के कलम की रफ्तार न रोक सकें।

संस्थापक कार्तिक टम्टा ने ऐलान किया है कि पिथौरागढ़ की सरज़मीं से शुरू हुआ यह कारवां अब थमने वाला नहीं है। उन्होंने संकल्प लिया है कि वे उत्तराखंड के हर कूचे  का दौरा कर शिक्षा सुधार की मशाल रोशन करेंगे। इसी मिशन के तहत उनकी टीम शनिवार को गंगा की मुकद्दस  नगरी हरिद्वार पहुँच रही है। वहाँ के प्रबुद्ध समाजसेवियों के साथ मिलकर आंदोलन की ऐसी मशक्कत तैयार की जाएगी, जिसकी गूँज सत्ता के गलियारों में खलबली मचा देगी।

 

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