देहरादून (आरसी / संदीप कुमार) उत्तराखंड की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर अभी से बिसात बिछनी शुरू हो गई है। राज्य के प्रमुख क्षेत्रीय दल उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) के बीच बढ़ती नजदीकियों ने प्रदेश के सियासी पारे को गरमा दिया है। राजधानी देहरादून में आज हुई एक अहम बैठक में उत्तराखंड क्रांति दल के कद्दावर नेता काशी सिंह ऐरी और ललित बिष्ट ने आरपीआई (आठवले) के प्रदेश अध्यक्ष सेठपाल सिंह से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि दोनों दल आगामी चुनावों में एक-दूसरे का हाथ थामकर चुनावी समर में उतरने का मन बना चुके हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस बैठक के दौरान दोनों दलों के बीच चुनावी तालमेल को लेकर बेहद गंभीर और विस्तृत चर्चा हुई है। बताया जा रहा है कि रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया ने यूकेडी के साथ मिलकर चुनाव लड़ने के प्रस्ताव पर काफी सकारात्मक रुख दिखाया है और कुछ चुनिंदा सीटों पर समर्थन देने की सहमति भी जताई है। इस संभावित गठबंधन का मुख्य केंद्र उत्तराखंड के तराई वाले हिस्से और हरिद्वार के ग्रामीण क्षेत्र रहने वाले हैं, जहाँ दोनों दल अपनी साझी ताकत के जरिए मजबूत पकड़ बनाने की रणनीति पर मंथन कर रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह गठबंधन आधिकारिक रूप लेता है, तो राज्य में एक नया सियासी समीकरण जन्म लेगा। जहाँ यूकेडी राज्य की क्षेत्रीय भावनाओं और पहाड़ी अस्मिता का प्रतिनिधित्व करती है, वहीं आरपीआई का साथ मिलने से उन्हें मैदानी इलाकों और दलित-पिछड़ा वर्ग के बीच अपना जनाधार बढ़ाने में मदद मिलेगी। हालांकि, सीटों के बंटवारे और गठबंधन की औपचारिक घोषणा पर अभी अंतिम मुहर लगनी बाकी है, लेकिन जिस गर्मजोशी के साथ दोनों पक्षों के बीच बातचीत आगे बढ़ी है, उससे साफ संकेत मिलते हैं कि 2027 की चुनावी जंग में भाजपा और कांग्रेस जैसे दिग्गजों के सामने यह नया मोर्चा एक कड़ी चुनौती पेश कर सकता है।
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