हरिद्वार(आरसी / संदीप कुमार) धर्मनगरी में अपराधियों के बुरे दिन शुरू हो गए हैं! अगर आप कानून की आंखों में धूल झोंककर यह सोच रहे थे कि खाकी सो रही है, तो सावधान हो जाइए। हरिद्वार के तेजतर्रार एसएसपी नवनीत सिंह ने अपनी स्पेशल फोर्स के साथ मिलकर वो ‘तांडव’ मचाया है कि वारंटियों के पसीने छूट गए हैं। जिले में “ऑपरेशन प्रहार” का ऐसा चक्रव्यूह रचा गया कि शातिर से शातिर भगोड़े भी उसमें फंसकर सीधे सलाखों के पीछे पहुँच गए।
दहशत का दूसरा नाम बना “ऑपरेशन प्रहार”
कप्तान नवनीत सिंह का पारा इन दिनों सातवें आसमान पर है। कोर्ट के आदेशों को हल्के में लेने वाले वारंटियों की लिस्ट तैयार की गई और फिर शुरू हुआ ‘मिडनाइट हंट’। कप्तान ने थानों को साफ़ अल्टीमेटम दिया था, “बहाने नहीं, अपराधी चाहिए।” बस फिर क्या था? आधी रात के सन्नाटे को चीरती हुई पुलिस की गाड़ियां जब वारंटियों के दरवाजों पर रुकने लगीं, तो इलाके में हड़कंप मच गया।
30 शिकार… एक साथ वार!
ज्वालापुर से लेकर रुड़की तक और गंगनहर से लेकर सिडकुल तक, पुलिस ने ऐसा ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ किया कि अपराधियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
ज्वालापुर में जुआरियों और नशे के सौदागरों को बिस्तर से उठाकर सीधे हवालात की ठंडी जमीन दिखाई गई।
रुड़की और गंगनहर में चेक बाउंस के धुरंधरों और जालसाजी के उस्तादों की सारी ‘हेकड़ी’ धरी की धरी रह गई।
बहादराबाद और मंगलौर में भी पुलिस ने वो ‘इलाज’ किया कि भगोड़े अब थाने में सरेंडर करना ही बेहतर समझ रहे हैं।
खाकी का खौफ: कप्तान की ‘मुरली’ पर नाच रहे अपराधी
यह केवल गिरफ्तारी नहीं है। यह उन पीड़ितों की जीत है, जो न्याय की आस में वर्षों से भटक रहे थे। एसएसपी नवनीत सिंह की इस धाकड़’ कार्यशैली ने यह साफ कर दिया है कि हरिद्वार में कानून की मर्जी चलेगी, किसी गुंडे या भगोड़े की नहीं। अपराधियों में इस कदर खौफ है कि अब वे या तो जिला छोड़ने की फिराक में हैं या फिर सरेंडर करने का रास्ता ढूंढ रहे हैं।
चेतावनी साफ़ है, अगर वारंट जेब में है और आप घर पर चैन की नींद सो रहे हैं, तो सावधान रहें… क्योंकि “ऑपरेशन प्रहार” की अगली दस्तक आपके दरवाजे पर हो सकती है। कप्तान का हंटर अभी थमा नहीं है, यह तो बस ट्रेलर है, पूरी फिल्म अभी बाकी है!
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