रुड़की (आरसी/संदीप कुमार): जनपद हरिद्वार में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के कड़े निर्देशों के जारी होने के बावजूद रुड़की ब्लॉक के शांतरशाह गांव की जमीनी हकीकत प्रशासन के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। गांव की सरकारी ट्यूबवेल के पास खाली पड़ी ग्राम पंचायत की भूमि इस समय कूड़े का अंबार बन चुकी है। जहां कुछ ग्रामीण और चिकन सेंटर संचालक खुलेआम कचरा डाल रहे हैं। स्थिति यह है कि दिन भर कटे हुए मुर्गों के अवशेष, पंख और रक्त को रात के अंधेरे में इसी सार्वजनिक भूमि पर फेंक दिया जाता है। इस कचरे के कारण देर रात तक यहां आवारा कुत्तों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे वहां से गुजरने वाले ग्रामीणों, महिलाओं और स्कूली बच्चों का निकलना दूभर हो गया है। पास ही स्थित सरकारी ट्यूबवेल से ओवरफ्लो होने वाला पानी इस सड़ते हुए कचरे के साथ मिलकर पूरे क्षेत्र में भयंकर दुर्गंध फैला रहा है। जिससे यह स्थान अब बीमारियों का केंद्र बनता जा रहा है। कूड़े का ये अंबार धीरे धीरे रास्ते को भी अपनी जद में लेता जा रहा हैं।
यह दयनीय स्थिति तब है जब सोमवार को ही मुख्य विकास अधिकारी ने हरिद्वार कलेक्ट्रेट में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित कर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के अनुपालन के लिए सभी नगर निकायों और खंड विकास अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन ने ग्राम पंचायतों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन योजनाएं तैयार करने, घर-घर कचरा संग्रहण सुनिश्चित करने और खुले में कचरा फेंकने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के आदेश दिए हैं। सीडीओ ने स्पष्ट किया है कि कचरा फेंकने के संवेदनशील स्थलों की पहचान कर उनका तत्काल निस्तारण किया जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाए। साथ ही, प्रत्येक विकास खंड को अपनी प्रगति रिपोर्ट स्वच्छता कंट्रोल रूम को उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।
मुख्य विकास अधिकारी के इन सख्त आदेशों के बाद अब शांतरशाह गांव के निवासियों की नजरें स्थानीय प्रशासन पर टिकी हैं। ग्रामीण उम्मीद कर रहे हैं कि जिला प्रशासन के इस नए फरमान का असर धरातल पर दिखेगा और गांव के इस मुख्य रास्ते को गंदगी से मुक्त कराया जाएगा। अब देखना यह है कि संबंधित अधिकारी इस कूड़े के ढेर का स्थायी समाधान कब तक करते हैं और क्या चिकन सेंटरों द्वारा फैलाई जा रही इस गंदगी पर कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
![]()
