हरिद्वार (आरसी/संदीप कुमार) उत्तराखंड के खानपुर के पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह ‘चैंपियन’ एक बार फिर गंभीर विवादों के घेरे में आ गए हैं। उन पर दलित समाज के प्रति अपमानजनक जातिगत टिप्पणी करने और अभद्र भाषा का उपयोग करने का गंभीर आरोप लगा है, जिसके बाद से हरिद्वार क्षेत्र के दलित समुदाय में भारी रोष व्याप्त है।
लंबे समय से अपने विवादास्पद और आपराधिक इतिहास के लिए चर्चा में रहे कुंवर प्रणव सिंह पर इस बार दलित समाज ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। पूर्व में हुए विभिन्न आपराधिक मामलों में मिली जमानत और कानूनी प्रक्रियाओं से बार-बार बच निकलने की चर्चाओं के बीच, इस बार समाज के लोगों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस मामले को रफा-दफा नहीं होने देंगे।
इस प्रकरण को लेकर अंतरराष्ट्रीय रविदास धाम के संस्थापक योगेश प्रमुख ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने प्रशासन को सीधे तौर पर चेतावनी देते हुए कहा है कि उन्हें अब वोटों की कोई चिंता नहीं है, बल्कि उन्हें सिर्फ और सिर्फ न्याय चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस बार समाज को केवल दिखावे की कार्यवाही स्वीकार नहीं है, बल्कि दोषी के खिलाफ ठोस और पक्की कानूनी कार्यवाही होनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी किसी की गरिमा के साथ खिलवाड़ करने का साहस न कर सके।
कुंवर प्रणव सिंह ‘चैंपियन’ का अपराधिक रिकॉर्ड काफी लंबा और पुराना रहा है। जनवरी 2025 में खानपुर के विधायक उमेश कुमार के रुड़की स्थित कैंप कार्यालय पर फायरिंग के मामले में उन्हें जेल भेजा गया था। इसके अलावा 2019 में हथियारों के साथ उनका वायरल हुआ विवादित वीडियो, 2003 में लक्सर में मगरमच्छ के शिकार का मामला, 2009 व 2011 में फायरिंग की घटनाएं और 2015 में कैबिनेट मंत्री के आवास पर हुई हवाई फायरिंग जैसे कई गंभीर मामले विभिन्न अदालतों में आज भी लंबित हैं।
इस ताजा विवाद ने हरिद्वार की राजनीति और सामाजिक परिवेश में हलचल मचा दी है। दलित संगठनों का साफ कहना है कि पूर्व विधायक का पुराना रिकॉर्ड और बार-बार विवादों में रहने की आदत इस बात को दर्शाती है कि कानून का भय उन पर प्रभावी नहीं रहा है। अब स्थानीय जनता और विभिन्न सामाजिक संगठनों की नजरें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि क्या इस बार कानून बिना किसी राजनीतिक दबाव के अपनी निष्पक्षता साबित करेगा या फिर यह मामला भी पुरानी घटनाओं की तरह फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।
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