रुड़की (आरसी / संदीप कुमार) विकासखंड रुड़की के अंतर्गत आने वाले ग्राम शांतरशाह में फैली गंदगी और कूड़े के ढेरों ने प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली और उनकी संवेदनहीनता को कटघरे में खड़ा कर दिया है। गाँव के मुख्य रास्ते पर लगे कूड़े के अंबार से उठ रही असहनीय दुर्गंध ने ग्रामीणों का जीना दूभर कर दिया है। बुधवार को हुई बारिश के बाद स्थिति और भी ज्यादा भयावह हो गई है। जिससे पूरे इलाके में संक्रमण और बीमारियों के फैलने का खतरा पैदा हो गया है। बावजूद इसके, संबंधित अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ते हुए आंखें मूंदे बैठे हैं।
ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली बेहद उदासीन हो चुकी है। समस्या के समाधान के लिए जब भी ग्रामीण जिम्मेदार अधिकारियों को फोन के जरिए गुहार लगाते हैं, तो अधिकारी या तो फोन नहीं उठाते या फिर सुनने को तैयार नहीं होते। कुर्सी पर बैठे इन ‘लापरवाह’ अधिकारियों का यह रवैया सरकार के ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावों की धज्जियां उड़ा रहा है। बड़े-बड़े स्वच्छता अभियान और सफाई व्यवस्था के वादे शांतरशाह में पूरी तरह विफल साबित हो रहे हैं।

स्थिति यह है कि खबर लिखे जाने तक किसी भी स्तर से कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई है, जो सीधे तौर पर विभागीय अधिकारियों की लापरवाही को दर्शाता है। ग्रामीण अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं और यह सवाल उठाने को मजबूर हैं कि क्या शांतरशाह की जनता को हमेशा इसी नारकीय और बदबूदार माहौल में जीने के लिए मजबूर किया जाएगा? प्रशासनिक अधिकारियों की इस चुप्पी और जनता के प्रति उनके गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार ने ग्रामीणों के आक्रोश को और बढ़ा दिया है। यदि जल्द ही कूड़े का निस्तारण नहीं किया गया, तो कभी भी बड़ा स्वास्थ्य संकट पैदा हो सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी।
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